Friday, April 24, 2009

प्यारी सहेली

मेरा नाम सरिता है, मैं बाईस वर्षीय खुबसूरत और मांसल बदन की औरत हूँ, मैं आधुनिक विचारों की हूँ और फैशनेबल तरीके से रहना मुझे अच्छा लगता है, मैं इस शहर में नई आई हूँ, मेरे पति रवि एक दवा कंपनी में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव हैं और महीनें में कम से कम पंद्रह या बीस दिन बाहर के दौरे पर रहते हैं,

मेरे पति काफी ब्रोड माइंडेड इंसान हैं, वे ना केवल मेरे लिये सेक्सी और रोमांटिक किताबें खरीद कर लाते हैं बल्कि ब्लू फिल्म भी दिखाते हैं, चुदाई के खेल में नये नये तरीके अपनाने के लिये उकसाते हैं, उनके कहने पर मैनें कई बार चुदाई के मामले में काफी मौज मस्ती की है, वे मेरी इस आदत का कभी बुरा नहीं मानते बल्कि खुश होते हैं,


हमने इस शहर में जो मकान लिया है वह दो कमरे का एक फ्लैट है, इस मकान के दो हिस्से हैं, जिसमें से एक में हमलोग रहते हैं और दुसरे हिस्से में एक अन्य नव दंपति रहते हैं, उन दोनों के नाम अनील और अलका है, अनील शायद किसी ऑफिस में काम करते हैं, वे सुबह दस बजे घर से निकलते हैं और शाम को पांच सवा पांच बजे तक वापस आते हैं, हाँ..कभी कभी उन्हें दौरे पर बाहर भी जाना पड़ता है,

अलका काफी सीधी सादी युवती है, मेरी उसके साथ कुछ ही दिनों में अच्छी दोस्ती हो गई, हमलोग आपस में हर तरह की बातें कर लेते हैं, अलका वैसे तो काफी संकोची स्वभाव की है लेकिन औरतें एक दुसरे के साथ घर बाहर की हर बातें बता देती हैं, यही हाल अलका का है, वह मुझे अपने परिवार की तमाम बातें बता देती है, यहाँ तक की हम दोनों अपनी सेक्स लाइफ के बारे में भी खुल कर बातें कर लेते हैं,


एक रोज अलका ने मुझे बताया की उसके पति अनिल को व्हिस्की पिने का शौख है और नशे में आने के बाद वह उसे काफी रात तक परेशान करते रहते हैं, यह बात सुन कर मुझे उत्त्सुकता हुई, मैं उसे कुरेदने लगी की वह इस बारे में और खुल कर बताये, काफी कहने के बाद आखिरकार अलका बताने को तैयार हुई,

वह बोली...." ये चाहते हैं की हमलोग कमरे की लाईट जला कर पुरे नंगे होकर चुदाई करें, इतना ही नहीं, वे मेरे से शराब पिने की भी जीद करते हैं, ताकि मैं भी उनकी तरह बे-शर्म हो जाऊँ, कई बार ये मुझसे अपना लंड चूसने को भी कहते हैं, लेकिन लंड चुसना मुझे बिलकुल अच्छा नहीं लगता, और लंड चूसने में मुझे कई बार उबकाई आ जाती है,"

अलका ने बातों बातों में यह भी बताया की अनिल का लंड काफी मोटा और लंबा है तथा चुदाई के दौरान वह काफी देर से झड़ते हैं, जितनी देर में वह एक बार झड़ता है उतनी देर में अलका दो बार झड़ जाति है,

"मेरे पति रवि की आदत उलटी है" अलका की देखा देखी मैं भी बताने लगी, "उन्हें अपना लंड पिलाने में उतना मजा नहीं आता जितना की मेरी चूत चुसने में आता है, मुझे चित लिटा कर जब वे मेरी चूत पर जुबान फिराते हैं और फीर मेरी फांकों को अपने होंठों में दबा कर चूसते हैं तो मेरा पूरा बदन गर्म हो जाता है, यदि मर्द चूत को मुंह में रख कर औरत के साथ मुख मैथुन करे तो वाकई उसे बहूत मजा आता है"

अलका बोली- "सरिता तुं कितनी खुश किस्मत है की तेरा पति तेरी चूत को मुंह से चाटता और प्यार करता है, काश मेरे पति भी ऐसे होते, लेकिन उनकी निगाह में तो बीबी कि चूत कि सिर्फ इतनी ही अहमियत है कि उसे अपने राड जैसे लंड से बुरी तरह ठोका पीटा जाये,"

"तुं इतना निराश क्यों हो रही है अलका?" मैनें अलका के गले में अपनी बाँहें डाल कर उसे अपने से चिपटाते हुवे कहा, " तेरी चूत चटवाने कि ज्यादा इच्छा हो तो किसी दिन अपने पति रवि से तेरी यह इच्छा पूरी करवा दूँ, बोल? " मेरी बात पर अलका हंस कर रह गई,

लेकिन मैनें जब से उसके मुंह से यह सुना था कि उसके पति का लंड काफी मोटा और लंबा है और वह काफी देर से झड़ता है तब से मेरे मन में बार बार ये विचार पैदा हो रहा था कि काश एक बार किसी तरह मुझे अनिल का लंड देखने को मिल जाये,


संयोग से कुछ दिन बाद ही मेरी यह इच्छा पूरी हो गई, अलका ने एक दिन मुझे बताया कि उसकी शादी कि सालगिरह है और अनिल एक स्कोच कि बोतल लेकर आया है, वह रात में लाईट जला कर चुदाई भी करना चाहता है, यह सुन कर मैंने अलका को समझाया कि एक अच्छी बीबी कि तरह आज कि रात उसे यह सब करना चाहिये, जो कि उसका पति चाहता है, मेरी बात अलका कि समझ में आ गई,

वह बोली- " तुं ठीक कह रही है सरिता, पति को जिस चीज में ख़ुशी मिले औरत को वही काम करना चाहिये, मैंने सोच लिया है कि आज मैं स्कोच भी पीउंगी और इनके साथ खुल कर चुदाई भी करुँगी, आज मैं इनको पुरी तरह खुश कर देना चाहती हूँ, "

अलका कि बात सुन कर मेरा दीमाग दौड़ने लगा, मैंने सोचा कि आज अनिल और अलका अपने कमरे में लाईट जला कर चुदाई करेंगे, अतः आज अनिल के लंड को देखने का काफी अच्छा मौका है, यह इच्छा काफी दिन से मेरे मन में अंगडाई ले रही थी, लेकिन उसके पूरा होने का वक्त आज आया था, शाम को अलका और अनिल घुमने चले गये, बाहर से पिक्चर और खाना खाने के बाद लगभग दस बजे वे लोग वापस आये, मैं उनके इन्तजार में अभी तक जाग रही थी,

अलका और मेरे बैडरूम के बिच में सिर्फ एक खिड़की थी, जो कि बंद रहती थी, लेकिन दूसरी तरफ लाईट जलती हो तो खिड़की कि दरार से दुसरी और दिख जाता था, मैंने सोच लिया था इसी दरार का फायदा उठाऊंगी,

करीब साढ़े दस बजे मैंने अपने कमरे कि लाईट बुझा दी और खिड़की के पास जम गई, जैसे ही मैंने दरार से झाँका तो पता चला कि अलका और अनील के प्यार का खेल शुरू हो चूका है, अलका ने आज पुरा मेकअप कर रखा था और वह काफी सुन्दर लग रही थी, इस समय वह अपनी साड़ी और ब्लाउज उतार चुकी थी और केवल लाल रंग का पेटीकोट और काले रंग कि डिजाइनदार ब्रा उसके बदन पर शेष थी, उधर अनील के जिश्म पर केवल अंडरवीयर था, उसका विशाल सीना और जाँघों कि जोड़ पर उसका उठा हुआ अंडरवीयर साफ़ चमक रहा था,

अनील ने पहले अलका को अपनी गोद में बिठाया और उसके होंठों को चूसने लगा, जवाब में अलका भी उसे चूमने लगी,

कुछ देर बाद वे पुरी तरह नंगे हो कर चुदाई में लग गये, मैं हैरानी से अनील के बदन कि मजबूती देखती रह गई, अलका का कहना बिलकुल सच था कि उसका पति देर से झड़ता है, उसके जबरदस्त धक्कों से अलका तो थोडी देर में ही झड़ गई थी, लेकिन अनील फिर भी उसकी चूत में लंड डाले पड़ा रहा और अपनी बीबी कि चुचियों को मसलता रहा और उसके होंठों को चूसता रहा, कुछ ही देर में अलका दोबारा गर्म हो गई और अपने पति के छकों का जवाब छकों से देने लगी, अनील जोर जोर से लंड उसकी चूत में अन्दर बाहर करते रहा, करीब बीस मिनट कि रगडाई के बाद दोनों बारी बारी से झड़ गये, अब अलका के साथ साथ अनील भी पूरा संतुष्ट नजर आ रहा था,

अनील का दमदार लंड देख कर मेरा मन लालच में पड़ गया, दुसरे मर्दों के प्रति मेरे विचार काफी खुले हुवे थे, क्योंकि मेरे पति रवि ने शादी के तुंरत बाद से ही मुझे अपने दोस्तों से मिलवाना शुरु कर दिया था, वे लोग ना केवल मेरे साथ हंसी मजाक करते थे बल्कि कई बार तो मेरे बदन से भी छेड़ छाड़ कर लेते थे, यह सब चोरी छिपे नहीं होता था बल्कि खुले आम होता था और मेरे पति भी उस वक्त मौजूद रहते थे, मेरे पति कि तरह उनके सारे दोस्त भी काफी ब्रोड माइंडेड थे, रवि उन लोगों कि बीबियों के बदन पर खुलमखुल्ला हाँथ डाल देते थे, पर वे लोग बुरा नहीं मानते थे,




चूँकि मैं अपने पति रवि का स्वभाव जानती थी, इसलिए अनिल के लंड को देखने के बाद मैनें मन में ठान लिया था कि मैं रवि को सब कुछ बता कर अनिल से चुदवाउंगी, मैनें यह भी सोच लिया था कि मैं किसी ना किसी बहाने अलका को रवि से चुदवाने के लिए राजी कर लुंगी, ताकि रवि को ये सारा खेल एक तरफा ना लगे,

अपनी योजना पर चलते हुवे मैनें अलका के साथ सेक्सी मैगजीनों का आदान प्रदान शुरू कर दिया, बीच बीच में मैं उसे बताती रहती कि मेरे पति रवि उसे बहुत पसन्द करते हैं और मेरे से कहते रहते हैं कि अलका कितनी सेक्सी औरत है, यह सब सुन कर अलका काफी खुश हो जाती थी,

कई बार वह मजाक में कहती " सरिता अगर मैं तेरे पति रवि को फांस लूँ तो तुं क्या करेगी,"

" करना क्या है, मेरी जान,? " मैं भी हंस कर बोल देती " तुं रवि को फंसयेगी तो मैं तेरे पति अनील को फंसा लुंगी, कितना मोटा और सख्त लंड है अनील का, कितना मजा आयेगा जब तेरे पति मुझे अपनी जाँघों के बीच दबायेंगे और मेरे पति तेरी चुसवाने को बैचैन चुत को जम कर चूसने के बाद जम कर चोदेंगे, समझ ले उसके बाद तो हमलोगों कि दोस्ती और भी पक्की हो जायेगी, " इतना कह कर मैं और अलका एक दुसरे से लिपट जाती,



इसी बीच मेरे पति घर आये, मैनें उन्हें भी बताया की अलका उन्हें बहुत पसंद करती है और जब भी मैं उसे बताती हूँ की चुदाई के समय आप किस तरह से मेरी चूत को चुसते हैं तो वह बुरी तरह उत्तेजित हो जाती है, ये बातें सुन कर रवि बहुत खुश हुवे और कहने लगे,

" डार्लिंग, अलका है तो काफी खुबसूरत, किसी रोज उसे पटा कर बैडरूम में ले आओ तो उसे अपने लंड का मजा चखा दूँ, "

" अलका तो कब से बैचैन है डार्लिंग," मैनें अपने पति से झूठ मुठ कहा, " वह कई बार कह चुकी है की किसी रोज अपने हसबेंड से मेरा क्रास करवा दो, लेकिन मैनें हामी नहीं भरी, आखिर तुमसे पूछना भी तो जरुरी था, "

" कमाल करती हो डार्लिंग, " रवि बोले, " ऐसे कामों के लिये भी पूछने की जरूरत होती है क्या? अरे यार अलका जैसी मांसल और गठीली औरत को चोदने के लिये तो मैं आधी रात को घने जंगल तक में जा सकता हूँ, "


" तो फिर ठीक है, मैं आज ही अलका को हरा सिगनल दे देती हूँ, " मैनें कहा, " लेकिन डीयर मेरी भी एक शर्त है, अगर तुम अलका के साथ धक्कम धक्का करोगे तो मैं भी उसके हसबेंड अनिल के साथ चुदाई का मजा लुंगी, तुम्हे इसमें कोई आपति तो नहीं,? "

" कमाल करती हो सरिता, यह भी कोई आपति करने लायक बात है,? अरे यार, हम पढ़े लिखे और मॉडर्न लोग हैं, हमें अपना जीवन पूरी आज़ादी के साथ गुजारने का हक़ है, मेरी तरफ से तुम्हे पूरी आज़ादी है की तुम अनील के साथ जम कर चुदाई का मजा लूटो, चार दिन की यह जवानी है, हमें इसका भरपूर मजा लेना चाहिये, " रवि बोले,



फीर तो मैं अनील को फंसाने को पूरी तरह तैयार हो गई, अनील दो तीन दिन बाद ही दौरे पर चले गये, संयोग से इसी बिच अलका की माँ की बिमारी का फोन आ गया, उसे फौरन अपने मायके जाना पड़ा, जाते जाते वह अपने पति के खाने पिने कि जिम्मेदारी मेरे उपर डाल गई जिसे मैनें ख़ुशी ख़ुशी मान ली,

अगले दिन मैनें अपनी कामवाली को पुरे दिन कि छुट्टी दे दी, वह रविवार का दिन था, नहा धो कर मैनें जींस और स्लीवलेस शर्ट पहनी और होंठों पर कॉफी कलर कि लिपिस्टिक लगा ली, दोपहर में अनील को मैनें अपने घर पर बुला कर खाना खिलाया, खाना खाते समय वह बार बार कनखियों से मुझे देख रहा था, मैं समझ गई मेरी खूबसूरती उसे घायल कर दे रही है,

जब वह खाना खाकर जाने लगा तो मैं उससे लीपट गई और बोली, " मेरा जी बहुत घबरा रहा है अनील, प्लीज, इस वक्त मुझे छोड़ कर मत जाओ," उससे लिपटते वक्त मैनें इस बात का खास ध्यान रखा था कि ब्रा मैं तनी हुई मेरी गोल गोल चूचियां अनील के सिने से अच्छी तरह सट जायें,

मेरी बात मान कर अनील वहीँ बैठ गया, उसने इस समय केवल बनियान और लुंगी पहन रखी थी, मेरा मन हो रहा था कि उसके ये दोनों कपडे हटा कर उसके लंड को बाहर निकाल लूँ और उसे जी भर कर प्यार करूँ,

अनील मुझे एक टक देख रहा था, मैनें उसकी ओर मादक निगाहों से देख कर अपनी आँख मार दी, अब तो अनील को जोश आ गया, शायद उसे मेरे मनोभावों का अंदाज हो गया था, उसने अपनी बनियान उतार दी और मेरे पास आकर बैठ गया, मैं अपनी हथेली उसके सिने पर फिराने लगी, फीर अचानक मैनें उसे चूम लिया,

फिर तो अनील पूरा मर्द बन गया, उसने मेरी शर्ट जींस ब्रा और पेंटी तक उतार डाली और अपनी लुंगी भी खोल फेंकी, मैनें जैसे ही उसकी दोनों जाँघों के बिच लटकते उसके लंड को देखा तो अपने नंगेपन का ख़याल छोड़ कर मैं उस पर झपट पड़ी और अपने हांथों से उसे दबोच लिया, फिर उसे अपने होंठों से चूमती चाटती हुई मैं बुदबुदाने लगी,


फीर हम दोनों जोरदार धक्का मुक्की में लग गए, कुछ ही देर में मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया, लेकिन अनील अभी भी पुरी तरह मजबूती से मैदान में डटा हुवा था, वह मेरा पानी छुट जाने के बाद भी मेरी चुचियों को प्यार से सहलाता रहा और मेरी जाँघों और मेरी चुत को हौले हौले मसलता रहा, कुछ देर में मेरे बदन में दोबारा आग लग गई, मैं भी अनील के लंड से खेलने लगी,

फिर तो अनील ने मुझे दोबारा चित कर दिया और मेरी चुत में अपना लंड डाल दिया, मैं उछल उछल कर उसका उत्साह बढ़ाने लगी और वह कमर हिला हिला कर मेरी चुत पर जोरदार धक्के मारने लगा, मैनें अपने आप को रोकने की बहुत कोशिश की लेकिन अनील के लंड ने मेरी कसी हुई चुत में ऐसी खलबली मचा दी थी की थोडी ही देर में मैं दोबारा झड़ गई,

इस बार अनील ने मेरा पानी छूटने के बाद भी मुझे छोडा नहीं और मेरी चुत पर जोर जोर से धक्के मारता चला गया, शायद वह भी झड़ने के करीब आ चुका था, कई जोरदार धक्के मारने के बाद वह अपने आठ इंच के लंड को जड़ तक मेरी चुत में घुसा कर मेरे उपर औंधा पड़ गया, उसके बदन में काफी जोर की सीहरन हुई और उसके साथ ही उसके लंड ने मेरी चुत में गर्मा गर्म लावा उगल दिया, मैनें खुशी में उसको अपनी मांसल बाँहों में बाँध लिया और उसके चेहरे पर चुंबनों की बौछार कर दी,

अब मेरा मकसद तो पुरा हुवा, लेकिन मुझे अब अपने पति से किया वायदा पुरा करना था, इस लिए कुछ दिन के बाद जब अनील घर में नहीं था, मैनें उसकी बीबी अलका को अपने घर बुला कर रवि के हवाले कर दिया, हालांकि काफी दिनों से अलका का मन रवि के साथ चुदाई का आनन्द लेने का था क्योंकि मैंने उसे बता रक्खा था की रवि को औरत की चुत चूसने और चाटने का महारत हासिल था, लेकिन कुछ तो वह शर्माती थी और कुछ वह अपने पति से डरती थी, इसलिए मैनें अनील के बाहर ज़ाने पर ही रंगा रंग कार्यक्रम का प्रोग्राम रक्खा था और अलका की शर्म दुर करने के लिये मैनें उससे वायदा किया था की जिस वक्त रवि उसके साथ चुदाई करेगा मैं उसके करीब मौजूद रहूंगी,


आपने कभी किसी औरत के बारे में नहीं पढ़ा या सुना होगा की कोई औरत खुद किसी पराई औरत को अपने पति के बिस्तर पर ले जाकर उन दोनों का क्रोस कराइ हो,? लेकिन मैनें खुद इस काम को अंजाम दिया, अपनी पड़ोसन अलका को रवि के बेड पर ले जा कर मैंने खुद अपने हांथों से हांथों से बारी बारी उन दोनों के कपडे खोले, फिर मैं अपने कपडे भी उतारने लगी,

चूँकि मैंने रवि को बता रक्खा था की अलका को अपनी चुत चुसवाने का काफी शौख है,लेकिन उसका पति अनील उसकी चुत चाट कर उसे वह सुख नहीं देता, अतः अलका के नंगे होते ही रवि उसकी कमर की ओर चेहरा करके लेट गया और दोनों हाँथ उसकी गांड पर जमा कर उसकी चुत चुसने लगा, फिर उसने अपनी जुबान बाहर निकाली और अलका की मलाई जैसी त्वचा पर फिराने लगा,

चुत पर रवि की जुबान लगते ही अलका बैचैन हो गई, वह दोनों हांथों से रवि के सीर और चेहरे को सहलाने लगी और गांड उचका कर अपनी चुत उसके होंठ पर छुवाने लगी, इससे रवि का जोश बढ़ता चला गया, उसने अलका की चुत की सुडौल मोटी मोटी फांकों को अपने मुंह में भर लिया और उन्हें चोकलेट की तरह चबाने लगा,

अलका का चेहरा उत्तेजना से लाल हो गया, वह अपने पुरे बदन को बुरी तरह तोड़ने मरोड़ने लगी, मैं औरत होने के नाते उसकी बैचैनी को समझ सकती थी, इस वक्त तक मैंने खुद को भी पुरी तरह नंगा कर लिया था, उसी हालत में मैं अलका के पास जाकर घुटनों के बल बैठ गई और उसकी चुचियों को हाँथ से धीमे धीमे सहलाने लगी,

अलका की चूचियां उत्तेजना के कारण पुरी तरह तन गई थी और उसके दोनों निप्पल भी सख्त हो गये थे, मैं झुक कर उसकी चुचियों पर जुबान फिराने लगी, फिर उसके एक निप्पल कों दांतों के बीच रख कर काटने लगी,

" हाय सरीता, कितनी अच्छी है तुं," अलका ने सिसिया कर मुझे अपनी बांहों में भर लिया,

" तेरे जैसी प्यारी सहेली मुझे पहले क्यों नहीं मिली.?

तभी रवि का हाँथ मेरी गांड पर आ गया और गांड को टटोलते टटोलते उन्होंने एक अंगुली मेरी चुत में घुसेड़ दी, उनकी इस हरकत से मैं भी उत्तेजित हो गई और पलट कर उन्हें देखती हुई बोली,

" अंगुली से काम नहीं चलेगा डार्लिंग, मुझे तो तुम्हारी तीसरी टांग चहिये, यही मेरी प्यास बुझा पायेगी, "

" सॉरी, डार्लिग, मेरी तीसरी टांग की बुकिंग तो आज अलका ने करवा रखी है, अगर तीसरी टांग से मैंने तुम्हारी सेवा की तो बेचारी अलका प्यासी रह जायेगी, मैं अनील तो हूँ नहीं जो की खुद झड़ने के पहले औरत को दो दो बार झडवा दूँ," रवि बोले और मेरी ओर देख कर मुस्कुराने लगे,

मैं रवि का ये कहने का मतलब तुरन्त समझ गई, दर असल अनील के साथ चुदाई करने के बाद अपने पति से उसकी मर्दानगी और मजबूती की काफी तारीफ़ की थी, इसी लिये उन्होंने इस समय यह बात मजाक में कही थी, लेकिन उनके इस नहले का जवाब मैनें दहले से दिया, मैं बोली,

" डार्लिंग, तुम अनिल भले ना हो, लेकिन उससे कम भी नहीं हो, मैं जानती हूँ की तुम अपनी पर उतर जाओ तो दो क्या, चार चार औरतों को पानी पिला सकते हो,"

" थेंक यु, मेरी जान, तुम्हारी इस बात ने मेरा जोश दस गुना बढा दिया है," रवि बोले,

" अब तुम मेरा कमाल देखो, मैं पहले अलका को चोदुंगा फिर तुम्हारी चुत की आग ठंडी करूँगा, इतना कह कर उन्होंने अलका की दोनों टांगों को उपर की ओर मोड़ दिया और उसकी चुत को चुटकियों से मसलने लगे,

रवि के मुंह से चुत चटवाने का स्वाद ले चुकने के कारण उसकी चुत पहले ही गीली हो चुकी थी अतः कुछ देर हाँथ से मसलने के बाद ज्यों ही अपना लंड उसकी चुत में डाल कर चोदना शुरू किया, वह बार बार काँपने लगी, उसकी हालत देख कर मैं समझ गई की वह ज्यादा देर तक रवि की मर्दानगी का सामना नहीं कर पायेगी और आखिरकार यही हुवा, रवि ने मुश्किल से बारह चौदह धक्के ही मारे होंगे की अलका बुरी तरह सिसियाती हुई उनसे चिपक गई, उसकी हालत दीवार पर चिपकी छिपकली जैसी दिख रही थी,

अलका को अपने से अलग करने के बाद रवि ने मेरी जाँघों के बीच आसन लगा लिया, काफी देर तक लंड चुत की आपस की लड़ाई के बाद हम दोनों एक साथ झड़ गये,

उस दिन के बाद से अलका और मेरा एक दुसरे के पतियों के साथ चुदाई का संबंध बराबर बना हुआ है, जब भी हम में से किसी का पति किसी काम से बाहर जाता है तो उसकी बीबी दुसरे के पति से अपनी चुत की गर्मी शांत करती है, आपसी सहमती का यह खेल पिछले दो सालों से चल रहा है, केवल अलका के पति अनील इस पूरी हकीकत से अनजान है, वह यही समझता है की मैनें उसके साथ संबन्ध बना रखे हैं, लेकिन उसकी बीबी अलका बिलकुल सीधी सादी और शरीफ है,

अभी हमने अनील को हकीकत बताया नहीं है, अलका डरती है उसके बताने से कोई गड़बड़ ना हो जाये,
shared with me by one of my friend pinki..........
mail karna na bhule
and jor se bolo lund chut ki jai.....

1 comment: