Wednesday, April 29, 2009

चोदते जाओ. चोदो मुझे.

राजेश टैरेस पर सुबह ७ बजे कसरत करने रोज आता है. उसकी कसरत करने कि बचपन से ही आदत रही है. उसकी हाईट और गठीला बदन इसके गवाह है. रोज एक घंटे कसरत करना फिर आधा लीटर दूध पीना और बादाम चबाना. इसके एक घंटे बाद भीगे चने खाना. सांड जैसी ताकत का मलिक बन चुका है. बी.कोम फाईनल ईअर का स्टुडेंट है. साथ में कोल्लेज में शरीर - शौर्य प्रतियोगिता में फर्स्ट प्राइज जीत चुका है.

राजेश का मकान एक कालोनी में एक साईड पर है. कालोनी में करीबन २५ मकान और है. राजेश के मकान के बगल से ट्रेन लाइन गुज़रती है. उसके मकान के बाद कालोनी खतम हो जाती है. उसके पड़ोस के मकान में जो फेमीली रहती है वह काफी छोटी फेमीली है. इस मकान में एकता अपने मा-बाप के साथ रहती है. एकता भी उसी कोल्लेज में बी.कोम फाईनल ईअर कि स्टुडेंट है.

एकता काफी सुन्दर और भरे बदन वलि है. उसे जो एक बार देखे तो देखता जाये. बड़ी -बड़ी आँखें, सुरीले होठ, गोल-गोल चिकने गाल, लम्बी मगर ज्यादा नहीं गर्दन, भरे-भरे सीने, पतली कमर, हल्की भरी हुई जाँघें. ऐसा है उसका रूप. उसकी नजर हमेशा बालकनी में पड़ते राजेश पर टिकी हुई रहती है. राजेश के कसरती बदन कि दीवानी है वों.

एकता की एक सहेली है श्रुति. श्रुति बचपन से ही बगैर बाप के अपनी मा के साथ दूसरी कालोनी में रहती है. श्रुति और एकता के बीच काफी जमती है. श्रुति काफी बिंदास किस्म की और कामुक लड़की है. ब्लू फिल्मे देखना, डिल्डो से अपनी प्यास बुझाना, फ्रिएंडस के साथ डेटस पर जाना. यही आदतें उसे काफी मोर्डन बन चुकी है. उसके इसी बिंदास - पन कि वजह से एकता उसकी और आकर्षित हुई थी. श्रुति के साथ काफी ब्लू फिल्मे देख चुकी थी. दोनों जब ब्लू फिल्मे देखती तब अपनी प्यास आपस में चूमा – चाटी करके और डिल्डो का प्रयोग करके बुझाती थी.

हालांकि श्रुति चाहती थी कि एकता भी न्यू-न्यू बोएफ्रेंड बनाके जिंदगी का मौज मजा लेवे, लेकिन एकता कि हिम्मत नहीं होती थी. उसके फादर कोल्लेज में प्रोफेसर है. उसे मालूम था कि अगर कोल्लेज में किसी को बोएफ्रेंड बनाया तो उसके बाप को मालूम चल जायेगा. लेकिन श्रुति कि संगत में रहकर उसके जिस्म कि भूख बढ़ने लगी थी. इसी दौरान उसका ध्यान राजेश कि तरफ गया. राजेश एकता कि नजर में काफी हैंडसम लड़का था. वों उस पर डोरें डालने के लिये हमेशा अपनी बालकनी में घूमती रहती थी. राजेश कि नजर में भी ऐसा आ चुका था.

लेकिन उसकी हिम्मत नहीं होती थी एकता से बात करने की. आग दोनों तरफ लगी हुई थी लेकिन दोनों ने अभी तक एक बार भी बातचीत नहीं की.

हर दिन राजेश टैरेस पर कसरत कर रहा होता है तभी एकता भी अपने मकान के टैरेस पर पहुंच जाती है. राजेश को कसरत करते देख वों अपनी टैरेस पर टहलने लगती है. उसकी चेष्टा यही रहती है कि कैसे भी राजेश कि नजर उस पर पड़े. अपने जिस्म कि नुमाइश करने के लिये अपनी छाती को अकड़ कर चलती है. जिससे एकता के बूब्स काफी बहर तन जाते है. राजेश अपनी कसरत करते हुए उसके तने हुए और धके हुए बूब्स को ललचती नजर से देखता है फिर वापस अपनी कसरत में लगा जत है. राजेश के गथिले बदन को देखते हुए एकता उसको ललचाई नजर से देखती रहती है. कसरत खतम होने के बाद राजेश अपनी बालकनी में दूध, बादाम और चने खाने के साथ पढ़ाई करने बैठा रहता है. एकता कपड़े सूखाने के बहने बालकनी में जो कि राजेश कि बालकनी के ठीक सामने है पहुंच जाती है. दोनों कि बालकनी में मुश्किल से १० फीट का फासला होगा.

कपड़े सुखाते समय अपने कपड़े को थोड़ा नीचे खिंच कर अपने उभारों को उपर से दिखाना, नीचे झुककर अपनी गर्दन से झांकते उभारों को प्रदर्शित करना और टेबल पर खड़ी हो कर अपनी टाँगों से आधी जाँघों तक का बदन दिखाना. यही उसका रोज का काम हो गया. राजेश भी उसके आधे दिखते उभारों और अधि दिखती जाँघों को देख कर एकता कि तरफ आकर्षित हो चुका लेकिन कभी इससे आगे बढ़ने कि हिम्मत नहीं हुई. कई दिनों तक यह सिलसिला चलता रहा.

एक दिन टैरेस से एकता वापस आयी तो उसके फादर और उसकी मा गाँव जाने कि तैयारी कर रहे हैं. कोई अर्जेंट काम आ गया है. मा को चिंता हो रही थी कि २ दिन एकता कहन रहेगी. लेकिन प्रोफेसर ने कहा,

‘एकता अब कोई छोटी बच्ची नहीं है. अकेली रह सक्ति है.’

मा बोली, ‘लेकिन कोई न कोई साथ रहना चाहिये ही.’ एकता ने कहा,

‘ठीक है. मैं अपनी फ्रिएंड श्रुति को बुल लेती हून. वों रह जायेगी मेरे साथ.’

प्रोफेसर श्रुति को जानता था. हालांकि उसके चाल-चलन के बारे में नहीं जानता था. उसने हामी भर दी. ओर गाँव कि और दोनों निकल पड़े. रास्ते में ही श्रुति का घर था. वहन रुक कर श्रुति और उसकी मा से मिल. उसकी मा को बताया,

‘हम लोग गाँव जा रहे है. घर पर एकता अकेली रहेगी. अगर आप श्रुति को हमारे घर २ दिन के लिये भेज दे तो बड़ी मेहरबानी होगी आपकी.’ श्रुति कि मा ने कहा,

‘कोई तकलीफ नहीं है भाई साहब. २ दिन श्रुति वहीं रहा लेगी एकता के साथ. जब तक आप नहीं आयेंगे तब तक श्रुति वहीं रहेगी.’ एकता का बाप धन्यवाद देते हुए अपने घर के मेन गेट कि चाबी श्रुति को देते हुए बोल,

‘चाबी मैं भूल से लेकर आ गया हू. यह चाबी लेकर चले जाना. मगर तुम दोनों ध्यान रखना अपना -अपना.’ ओर यह कह कर अपने गाँव निकल गये. श्रुति चाबी को अपनी जींस कि जेब में डाल कर आने वाले समय कि प्लन्निंग करने लगी. व्क्ड प्लयेर तो एकता के घर में था नहीं. सिर्फ डिल्डो को ही अपने साथ ले जा कर एकता के साथ २ दिन तक मजे लूत सक्ति है, ऐसा सोच कर एकता के घर में जाने कि तैयारी करने लगी. तभी श्रुति कि मा बोली,

‘२-३ घंटे बाद चली जान. अभी थोड़ा काम है यहाँ पर.’ उधर एकता अपने मा और बाप के जाने के बाद बाथरूम में घुस गयी. शोवर के नीचे बैठे -बैठे अकेले श्रुति के साथ रहने कि कल्पना ने उसे काफी रोमांचित कर दिया. ऐसी ही कल्पना में खोई हुई थी कि उसके हथ अपने आप बदन को सहलाने लगे. अपने बूब्स को खुद रगड़ने लगी. अपनी झाँटो को सहलाने लगी. अपनी चूत में अँगुली डालने लगी. पूरे बदन में काम-वासना हिलोरे मारने लगी. उसका सर जिस्म ठंडे पानी के शोवर के नीचे बैठा-बैठा जलने लगा. चूत में अँगुली करते हुए उसके मुँह से सिस्करियन निकल रही थी. तभी राजेश का ख्याल उसके दिमाग में आय.

झटके से उठी और गीले ही बाथरूम से निकल कर बालकनी कि और चल पड़ी.

हाल में पहुँचते ही उसे ध्यान आय कि उसके जिस्म पर एक रेशा भी नहीं है. अपने आप को ऐसी हालत में देखकर खुद अपने आप पर हँसने लगी. चाहत में इतनी पागल कभी नहीं हुई. वापस बाथरूम में गयी और एक बाथ -गाउन अपने बदन पर डाल साथ में कुछ गीले कपड़े सूखाने के लिये ले लिये.

सामने बालकनी में राजेश बैठा पड रहा था. राजेश ने उसके मम्मी और पापा को समन के जाते हुए देख लिया था. लेकिन उसे यह नहीं मालूम था कि वों लोग गये कहन है.

एकता बालकनी में आकर कपड़े सूखाने का नाटक करने लगी. असल में राजेश को टीज़ करना चाहती थी. कपड़े सूखाने के लिये वों बालकनी कि दीवार कि ओर झुकी जिसके कारण राजेश का ध्यान उस पर गया. लेकिन वापस बूक्स पड़ने लगा. अपनी और उसको ध्यान न देते देख एकता ने पीछे घूम कर बाथ -गाउन को अपने मम्मे के सामने से फैला दिया और वापस दीवार पर झुकी. सामने से गाउन के फैलने से उसके मम्मे दीवार के सहारे लगा गये और उपरि गोलीआँ राजेश को दिखाने लगी. राजेश यह सीन देखकर बावला हो गया. गोरे-गोरे मम्मे के उपरि हिस्से देख कर उसके शरीर में तनाव आने लगा. अब उसने अपनी बूक को अपने सामने रखकर बूक के उपरि हिस्से से एकता के कबूतरों का नयन-सुख लेने लगा.

एकता थोड़ी देर तक ऐसे ही खड़ी रही. हालांकि वों खड़ी खड़ी नीचे से अपनी हथेली का दबाव बढ़कर अपनी गोलोयिओन को उपर कि और धकेल रही थी. जिससे उसके मम्मे आधे हिस्से तक राजेश को दिखने लगे. राजेश कि कै दिनों कि मुराद पूरी हो रही थी.. फिर एकता दीवार से हटने के पहले अपने बथ-गोव्न कि डोरी को खोल दिया. जैसे ही वों दीवार से हटी उसके पूरे मम्मे एक झलक दिखा कर राजेश कि और उत्तेजन को बड़ा दिया. उस एक झलक में राजेश कि अंखोन ने एकता के मम्मो कि पूरी झलक देख ली.

एकता यही नहीं रुकी. एक टेबल को खिसका कर बालकनी के उपरि हिस्से में कपड़े सूखाने खड़ी हुई. टेबल पर खड़ी हो जाने से उसका चेहरा राजेश को नहीं दिखा पद रहा था लेकिन उसकी मांसल जाँघें जरूर दिखने लगी. एकता खड़ी खड़ी राजेश के उलटी तरफ घूम कर अपने बथ-गोव्न को थोड़ा उपर सरका लिया. ग़ोव्न के उपर सरकने से उसकी टाँगे और अधि से ज्यादा जाँघें राजेश को दिखने लगी. उसके तन-बदन में आग लगा गयी. तभी एक धमक हुआ. एकता ने घूम कर बथ-गोव्न को उपर हटा कर अपनी चूत कि झलक राजेश को दिखा दी. राजेश के लिये यह बहुत बद धमक था. उसकी अंखोन ने आज पहली बार किसी कि चूत को देख था. चूत देख उसका लन्ड फनफना उठा. बूक्स उसके हथ से गिर पड़ी. होठ सूखने लगे. अपनी अंखोन पर उसे यकीन ही नहीं हो रहा था. बूक के नीचे गिरने का सीन देखकर एकता कि हंसी छूट गयी और वों राजेश कि तरफ मुस्कराती हुई अपने रूम में चली गयी.

राजेश हक्काबक्का होकर कै देर तक यूहि बैठा रहा. उसे अबतक यकीन नहीं हो रहा था कि वाकई में उसने एकता कि चूत देखी थी. उसका लन्ड उछल-उछल कर इसकी गवाही दे रहा था कि चूत के दर्शन हुए थे. फिर उसके दिमाग में एकता ही घुस गयी. बूक्स को साईड में रखकर एकता के सपने देखने लगा. कुछ सोच कर खड़ा हुआ और कपड़े पहन कर अपने मकान से निकला.

एकता के मेन गेट कि घंटी बजी. एकता उस समय राजेश कि बौखलाहट के सीन का मजा लेकर अपने रूम में बाल बन रही थी. उसी बथ-गोव्न में गेट खोलने चली. उसका अंदाजा था कि श्रुति आयी होगी. इस लिये उसने कपड़े बदलने जरूरी नहीं समझे. गेट खोला. सामने राजेश खड़ा था. राजेश को देख वों एकदम से हडबडा उठी. उसने सपने में ही नहीं सोच था कि राजेश इतनी हिम्मत कर उसके घर आ जायेगा. मुस्कराते हुए बोली,

‘बोलिये क्या चाहिये?’

‘जी मैं मैं जी .’,राजेश खुद भी हडबडा रहा था.

‘हान .. हान बोलिये?’

‘जी मैं .. जी’

‘यह जी जी क्या कर रहे हो? बोलिये कौन चाहिये, ‘एकता ने कहा. साथ ही मन ही मन सोच रही थी कि बोलों न और भी देखना है.

राजेश के मन में आय कि बोल दे तुम्हारी जवानी चाहिये. फिर बोल दिया, ‘जी क्या मुझे थोड़ा दूध मिल सकता है?’

एकता मन ही मन सोच कि मम्मे देखकर दूध याद आय है. फिर कहा, ‘हान क्यों नहीं. आइये अन्दर आइये’

राजेश उसके घर में घुस और बोल, ‘मेरा दूध फट गया है. चाय बनाना है. मेहरबानी करके थोड़ा दूध दे दिजिये.’

एकता मन ही मन सोच कि दूध तो क्या पूरी दूध कि फैक्टरी ही हवाले कर दु. एक बार कहो तो सही. फिर बोली, ‘कितना चाहिये?’

राजेश कि हद्बदहत अभी तक खत्म नहीं हुई थी. उसी हद्बदहत में बोल, ‘जी . दूध चाहिये.’ फिर ध्यान आय कि कितना चाहिये यह पूछ रही तो वापस बोल, ‘जी एक कुप चाय बने उतना.’

‘सिर्फ एक कुप चाय के लिये ही.’

‘जी घर में कोई नहीं है. चाय कि तलब लगी है. देखा तो दूध नहीं है.’

‘घर में आज कोई नहीं है क्या?’

‘जी, सब बहर गये हैं. अब शाम को ही लोटेंगें.’

एकता फिर पूछी, ‘तो कितना दूध दून एक कुप के लिये.’

‘एक गिलास लगा जाता होगा एक कप में?’

एकता मन ही मन सोच कि इसे चाय बनाना आता नहीं है. फिर भी पूछ, ‘अगर चाय बनानी नहीं आती है तो बेठीये मैं बना देती हू.’

राजेश कि मन कि मुराद पूरी हो रही थी. जिसके ख्याल में खोया हुआ था वहीं चाय का ओफर कर रही है. शायद बाद में और कुछ भी ओफर करे. फिर भी बोल, ‘जी आप क्यों तकलीफ उठती है. मैं घर पर पी लूंगा.’

एकता मुस्कराते हुए पूछी, ‘आप को चाय बनानी आती है?’

राजेश फंस गया. उसे कहना पद, ‘जी आती तो नहीं है.’

एकता ने उसका हथ पकड़ कर सोफे पे बैठाया और बोली, ‘इसमें क्या बड़ी बात है. आइये आज में आपको चाय बनाना भी सिखाती हून.’ एकता के भी मन कि मुराद पूरी हो रही थी. लेकिन अपने जज़बात को दिखाना नहीं चाहती थी.

राजेश उसके हथ का स्पर्श पा कर मदहोश हुआ जा रहा था.

एकता के पीछे पीछे वों भी किचन में घुस गया. एकता उसको चाय बनाना का तरीका बताने लगी. राजेश का ध्यान चाय सिखने में नहीं बल्कि एकता के बदन कि महक पाने में था. उसके बदन कि महक राजेश को मस्त कर रही थी. चाय बनाना के कारण २-३ बार एकता का बदन राजेश के बदन में तक्र गया. आपस में बदन टकराने कि वजह से दोनों के बदन में करंट दौड़ रहा था. लेकिन पहल न राजेश कर रहा था न ही एकता कर रही थी.

चाय बन्ने के बाद एकता और राजेश दोनों हाल में आ गये. दोनों ने चाय पी. चाय पीते -पीते दोनों एक दूसरे को देख रहे थे, महसूस कर रहे थे. फिर राजेश उठा खड़ा हुआ और गेट कि तरफ बढ़ने लगा. लेकिन मन ही मन सोच रहा था कि इतनी मेहनत करने के बाद कुछ भी हासिल नहीं हुआ. फिर मन में आय, अरे पागल, पहल तो खुद करेगा य एकता करेगी. चल तू खुद पहल कर.

ऐसे विचार से उसके मन में थोड़ी हिम्मत आयी. एकता के मम्मी और पापा घर में नहीं है ये जानकारी होते हुए भी वापस घूम कर पूछ,
‘क्या बात है? घर में कोई नहीं है.’

एकता मन ही मन सोच कि मुझ से मिलने आय है कि किसी दूसरे से. फिर भी बोली, ‘नहि, सब गाँव गये है.’

‘अकेली ही घर में हैं आप.’

एकता ने सोच कि अकेली होने का मालूम पड़ने पर शायद उसकी हिम्मत बंधे सो कहा दिया, ‘१-२ दिनों में आयेंगे सब.’

यह सुन कर वास्तव में राजेश कि हिम्मत बंध गयी, ‘आप को अकेले रहते हुए डर नहीं लगता?’

एकता के मुँह से निकल पद, ‘आप जो है.’ फिर बात को सम्भल्ते हुए बोली,

‘जी मेरा मतलब है कि आप लोग है न पड़ोस में.’

अपना होश सम्भल्ते हुए राजेश बोल, ‘आप तो रोज टैरेस पर आती है.’

‘आप भी तो रोज टैरेस पर कसरत करते है. मैं रोज आपको देखती हून.’

‘जी हान. मैं भी रोज आपको देखता हून.’

एकता पूछ बेठी, ‘रोज मैं तो आपको कसरत करते हुए देखती हून लेकिन आप मुझे क्यों देखते है.’

ऐसे सवाल कि राजेश को कोई उम्मेद नहीं थी. वों अच्कच गया. फिर कह दिया, ‘मालूम नहीं क्यों? लेकिन जब भी आपको टैरेस पर देखता हून तो आपको देखता ही रहता हून.’

एकता थोड़ी शर्माते हुए बोली, ‘ऐसी क्या खास बात है जो मुझे ही देखते रहते है.’

कुछ जवाब न सूझते देख राजेश ने आखिर डरते डरते कह दिया, ‘आपके नर्म, मुलायम, गुलाबी होठों कि वजह से.’

अपनी प्रशंसा को सुन कर एकता थोड़ी लजाती हुई बोली, ‘ऐसी क्या खास बात है मेरे होठों में?’

एकता को नाराज न होते देख राजेश कि हिम्मत बड़ गयी. उसके मन में आय कि आग दोनों तरफ बरबर लगी हुई है. बस पहल करने कि देरी है. उसने थोड़ा आगे बढ़ते हुए कहा,

‘आप को नहीं मालूम. लेकिन आपके होठ मेरे होश उड़ा देते है.’

‘चलो, ऐसे ही कहा देते हो य ‘

‘यह तो मेरे दिल से पूछिये.’

एकता उसकी अंखोन में झोंकती रहती है. यही हाल राजेश का होता है. उसकी अंखोन में झँकाता हुआ कब एकता के करीब आ गया मालूम ही नहीं पड़ा. दोनों के बीच केवल इंचेस में फासला रहा गया. दोनों कि साँसे टकराने लगी. तभी दोनों मनो नींद से उठे हो थोड़े अलग हो गये. लेकिन राजेश यह मौका गंवाना नहीं चाहता था.

वों एकता कि खुशामद करते हुए बोल, ‘प्लीज, एक बार इन होठों को चूमने दो.’

एकता थोड़ा नाराज होने का नाटक करती हुई बोली, ‘यह क्या कह रहे हो तुम..’

राजेश ने फिर गुजारिश कि, ‘प्लीज, एक बार.. फिर नहीं कहूँगा.’

एकता भी थोड़ा न-नकुर के बाद रजामंद हो गयी लेकिन एक शर्त पर. शर्त यह थी कि राजेश उसके बदन के दूसरे कोई हिस्से को नहीं छुएगा. इस पर राजेश ने भी एक शर्त रख डाली कि अगर मेरे होठों को अलग करने कि चेष्टा कि तो तुम्हारी शर्त खत्म हो जायेगी. फिर अगर राजेश बदन के किसी हिस्से को छू भी दे तो नाराज नहीं होगी.

दोनों शर्त लगा कर खड़े हो गये. राजेश ने कोई जल्दबाजी नहीं करते हुए एकता कि अंखोन में झांकना शुरु कर दिया. एकता भी उसकी अंखोन में खो गयी. दोनों एक दूसरे को निहारते हुए कब चुम्बन लेने लगे दोनों को ही मालूम नहीं पडा.

राजेश एकता को अपनी बाँहों के घेरे में लेकर उसके होठों का रस पीने लगा. अपने होठों से उसके होठों को रगड़ कर उसकी गुलाबी पंखुदियोन का रंग चुर रहा था. अपनी जीभ उसके मदक होठों पर फेर रहा था. अपनी हाथों का दबाव उसकी कमर पर दाल कर एकता को और अपने नजदीक ले रहा था. एकता को ऐसे चुम्बन से बहुत मजा आ रहा था. वों भी उसकी बाँहों में अपने आप को ज्यादा शकुन से महसूस कर रही थी. राजेश कि चेस्ट में बँधती जा रही थी.

राजेश ने चुम्बन के साथ अपने एक हथ से उसके बथ-गोव्न में छिपे उसके कबूतर को टटोलने लगा. एकता ने कसमसा कर विरोध किया. लेकिन राजेश अब मानने वाला नहीं था. उसने अपने दूसरे हथ से उसकी कमर पर घेर बनाये हुए उसे छूटने नहीं दिया. राजेश ने उसके मम्मे पर अपने हथ से छेड़ -छाड़ जारी रखी.

फिर एक समय ऐसा अय कि एकता का मम्मे बथ-गोव्न से निकल कर बहर आ गये. तब तक एकता को भी अपने मम्मे छिड़वाना में मजा आने लगा. अब वों कोई विरोध नहीं कर रही थी बल्कि मम्मे पर पड़े राजेश के हथ से उसके दिमाग में आनन्द छ रहा था.

राजेश ने अपने हथ से उसके लहराते मम्मे पर अपनी पाँचों अँगुली जम दी. उसके मम्मे गोल-गोल बीच में डार्क ब्रोव्न कलर का निप्पल. अब तक कि छेद-छद से उसके निप्पल कड़क हो चुके थे. उसने एकता कि पीठ अपनी तरफ कर उसके दोनों मम्मो को अपने हथ में थाम लिया. लगा मसलने उन्हें.

‘ऑह्ह्ह्ह’ एकता आनंद भरी सिसकारी लेने लगी.

दोनों बूब्स को हथ में लेकर राजेश उनसे खिलवाड़ करने लगा. उसकी चूची को अपनी उंगलियों के बीच में लेकर दबाने लगता. जब जोर ज्यादा लगता तो ‘आह्ह्ह’ भरी सिसकारी एकता के मुँह से निकल पड़ती.

राजेश ने अब एक हथ उसके मम्मे पर रख और दूसरा हथ उसके पेट पर से सरकता हुआ नीचे सरकने लगा. नीचे सरकता हुआ उसका हथ एकता कि रेशमी झाँटो पर पहुंच गया. मख़मली झाँटो को छेड़ने में राजेश को भरपूर मजा आ रहा था. एकता कि चूत अपने नजदीक राजेश के हथ को पा कर झनझना उठी. लेकिन राजेश ने कोई जल्दी नहीं करते हुए उसकी झाँटो में ही अपना हथ फंसाये रख. दूसरे हथ से उसके मम्मो के साथ खेल रहा था. फिर राजेश ने एकता को वापस अपनी और घूम लिया और झुकते हुए उसके एक मम्मे पर अपने गरम जलते हुए होठ रख दिये.

‘स्स्स्स्स्स्’ सिसकारी लेती हुई एकता अपने को सम्भाल नहीं पायी. उसने अपना एक हथ राजेश के सिर पर रख दिया.

राजेश अपने होठों से उसके मम्मे को चाटता रहा. जैसे जैसे राजेश उसके मम्मे को चाट रहा था वैसे- वैसे एकता के हथ का प्रेस्सर राजेश के सिर पर पड रहा था. राजेश अपने घुटने पर बैठ गया और उसके दोनों मम्मो को बारी -बारी से चाटने लगा. अपनी जीभ निकाल कर उसकी निप्पल को चाट रहा था. कभी अपने होठों के बीच उसकी निप्पल को लेकर दब देता. एकता के मुँह से निकल पड़ा,

‘चाटो राजेश इन्हें जी भर के चाटो .. तुम दूध लेने आये थे . लो मैंने अपनी दूध कि पूरी फैक्टरी तुम्हारे हवाले कर दी चाटो मेरे बूब्स . को . अह्ह्ह बड़ा मजा आ रहा है मेरे निप्पल को दबाओं चाटो चूसो मेरे ऋज् एश ‘

काफी देर तक उसके मम्मो को चाटने और चूसने के बाद राजेश उठ खड़ा हुआ और उसके गालों और होठों को चूमने लगा. एकता भी चुमवाती हुई अपने हथ को बढ़कर उसकी पेंट कि जिप और बटन खोल दी. इससे राजेश कि पेंट सर करती नीचे खिसक गयी. फिर राजेश ने अपने हथ से ही अपना उन्देर्वेअर नीचे कि और धकेल दिया. उन्देर्वेअर के नीचे जाते ही उसका लौड़ा उछल कर एकता के हथ में आ गया. लम्बा और मोटा, पेर्फेक्त लन्ड एकता के हथ में आते ही और उछलकूद मचानें लगा.
एकता ने उसके लन्ड को खड़े खड़े ही हथ में थाम कर कहा, ‘तुम्हारा लन्ड बहुत सख्त हो गया है’, और फिर उस पर अपनी अँगुली फेरने लगी. उसके चिकू को अपने हाथों में भरकर सहलाने लगी.

राजेश कि चूमा चाटी उसके गालों पर इससे बड़ गयी. तभी एकता अपने घुटनों के बल बैठ कर उसके लन्ड को अपने होठों से सटा लिया. अपने बन्द होठों पर उसके मूसल लन्ड से अपनी मसाज करने लगी. राजेश का लन्ड एक दुम गरम था. उसकी गर्मी से अपनी मसाज कर एकता अपने खून कि गर्मी को ओर बड़ा रही थी. फिर अपनी जीभ निकाल कर उसके लन्ड को उसकी जड़ से लेकर उसके सुपाडे तक चाटने लगी. एकता को मानो एक जिंदा बांसुरी मिल गयी हो. उसकी बांसुरी में अपनी राग छेड़ने लगी. अपनी जीभ से उसके चिकू और उसके केले को चख रही थी.

फिर अपने होठों को खोलकर राजेश के लन्ड को मुँह में ले लिया. लंड के मुँह में जाते ही राजेश के बदन का पूर लहू मानो उसके लन्ड में ही समा गया. एकता मुँह में लेकर अपने सिर को हीला-हीला कर उसके मस्त, मोटे और लम्बे लन्ड को चूसने लगी. उसकी इस चुसाई से राजेश ने अपने दोनों हाथों से उसका सिर पकड़ लिया और अंख बन्द कर उसकी इस लन्ड- चुसाई का मजा लेने लगा. राजेश के बदन का तनाव बढ़ता जा रहा था. उसकी सिस्करियन इसकी गवाह थी,

‘है. मेरी रानी चूसो मेरे लंड को बहुत .. दिनों का भूख है. इसे जी भर के चूसो आज मेरे लन्ड को चूस चूस कर मुझे पागल कर दो मेरी रानी ‘ ऐसा कहता जा रहा था और उसके सिर को थाम अपने लन्ड को हिलाने लगा.

एकता ने भी उसका जवाब देते हुए कहा, ‘अब मैं तुम्हारे लन्ड को जोर जोर से मुँह में ले कर चूसून्गि.. इसके लिये कब से तड़प रही थी. इस चोदू लन्ड का रस पी कर ही मेरी प्यास बुझेगि’

लन्ड को एकता के मुँह में लगातार पेल रहा था. जब उसे लगा कि ऐसे ही पेलता रहा तो उसका पानी निकल जायेगा तो झटके से बहर निकल एकता को सीध खड़ा कर दिया और उसका बथ-गोव्न को निकल फेंक. अब उसके सामने उसकी चूत थी. नीचे बैठा कर एकता कि दोनों टाँगों को थोड़ा फैला दिया और अपनी जीभ दे दी उसकी चूत में. अपनी जीभ से उसकी चूत के दाने को रगड़ने लगा. चूत के दाने पर राजेश कि जीभ के लगते ही सिस्करियोन कि बाढ़ आयी. एकता को अपनी टाँगों पर खड़े रहने में तकलीफ होने लगी. राजेश कि जीभ उसकी चूत में ज कर उसको पागल कर दी.

‘राजेश . ओह्ह्ह . उफ्फ्फ्फ्फ्फ . चाटो चूसो.. मेरी चूत. चाटो . इस लिये तो तुम्हें आज सुबह दिखाया था. मेरे रज. चाटो मेरी चूत . का पूर रस पीकर इसे अपनी जीभ से . अह्ह्ह . उफ्फ्फ . रगड़ों . मेरे रज. चूसो उफ्फूओ आह हाइ हाअन येआ येअह येअह चाट जाओ मुझे जुस्त एअत में ‘ ऐसी सिस्करियन लेती हुई एकता अपनी चूत को ठेलते हुए राजेश को जमीन पर सुला दिया और उसके मुँह पर अपनी चूत रगड़ने लगी. अपनी चूत को जोर जोर से राजेश के मुँह पर रगड़ रगड़ कर बोली,

‘खा जाओ मेरी चूत को आअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आआअह्ह्ह्ह पीईईई जाआआअओ मेरी चूऊत काअ रस.’ जब चूत कि चुसाई एकता को और सहन नहीं हो रही थी तो राजेश के मुँह के पास अपना मुँह ले जा कर फुसफुसा कर बोली,

‘अब क्यों देर कर रहे हो. अब मत तरसाओ मुझे . क्यों तड़पा रहे हो चलो अब चोदो मुझे. अपने लन्ड को मेरी चूत में डाल कर जोर-जोर के धक्के मारो. मेरी चूत कि खाज मित दो … अब दाल भी दो.’

लेकिन राजेश ने उसकी चूत को चूसना चालू रख. उसकी चूत को जीभ से चोद रहा था. लेकिन एकता को अब सहन नहीं हो रहा था. वों तो चाहती थी अब राजेश अपने लन्ड को उसकी चूत में पेल कर उसकी चूत कि भरपूर चुदाई करे. वों फिर राजेश से बोली,

‘अब बर्दाश्त नहीं. होता . राजेश .. अपना लन्ड मेरी चूत मैं पेल दो.. मुझे पीछे से घोड़ी बना कर चोदो’

राजेश अब खुद बेसब्र हो चुका था. उसने एकता को नीचे बैठा कर सोफे के सामने घोड़ी बना दिया और अपने लन्ड को चूत के लिप्स के बीच फंस दिया. फिर उसकी गर्दन थाम कर अपने चुतड़ उठा कर अपने लन्ड का एक जोर का धक्का दिया. लन्ड सीध उसकी चूत में जा कर फंस गया. लन्ड के अन्दर जाते ही वह चिल्लाने लगी,

‘’ओह्ह्ह ऊऊह्ह आअऊऊछ्ह्ह.. श्हीईए… मा…… ऊऊऊऊऊ स्स्स्स्सीईईए'’ कह कर एकता ने जोरदार सिसकारी ली.

फिर राजेश ने अपने लन्ड का जो धक्का लगन शुरु किया कि एकता कि रूह काँप गयी.

‘ऑऊओह्ह्ह थोड़ा धीरी आहिस्ता से प्लेअसे दर्द हो रहा है अह् औच’ कहते हुए राजेश को थोड़ा धीम करने कि कोशिश कि.

राजेश का बदन ऐसे ही कसरत करते हुए पहलवान का था. उसे कोई इतना जोर नहीं आ रहा था. वहीं एकता आज तक केवल डिल्डो से ही अपनी चुदाई कि थी. मोटे, पतले, लम्बे हर तरह के डिल्डो का प्रयोग करने के कारण उसे कोई तकलीफ नहीं हुई लेकिन डिल्डो अखीर डिल्डो ही होता है और असली लन्ड वों भी एक पहलवान का लन्ड दुसरी बात.

‘चोदो मुझे ऐसे ही चोदो चोदते जाओ. आज पूरी तरह से चोद डालों मुझे. तुम्हारे लन्ड के ऐसे ही झटके. उफ्फ्फ अह्ह्ह धक्के मारो. मेरी चूत तुम्हारा शुक्रिया मानेगी बस तुम मुझे यूहि चोदते जाओ. चोदो मुझे. आखिर मुझे भी कोई पहलवान का लंड मिल. वाह. क्या चोद रहे हो. आह. क्या चोदते हो तुम. चोदो चोदो.. अह्ह्ह्.’ एकता सिसकारी लेकर अपनी चूत को अब ज्यादा मस्ती से चुदवाने लगी.

राजेश भी उसकी सिस्करियन सुन कर और जोश में आ गया. वह ताबड़तोड़ जोर जोर के धक्के मारने लगा. उसके धक्कों कि स्पीड बड़ गयी. साथ ही उसकी भी सिस्करियन निकल रही थी. चोदने कि मस्ती में वों भी धक्के मारते हुए बोल रहा था,

‘’इस वक्त तुझे चूदने में बहुत मजा आ रहा है ले खा मेरा लन्ड ले मजा ले ले सम्भाल मेरे धक्के को तेरी चूत में बड़ी खुजली हो रही है न .. ले आज इसे मिटा ले ‘

एकता भी धक्के धक्के ख ख कर मजे ले रही थी. उसकी चूत कि खाज हर धक्के के साथ बड़ रही थी. अचानक उसे लगा कि चूत में कुछ हो रहा है. उसकी चूत का तनाव उसके दिमाग पर चड़ गया. फिर अपने आप को एक गहरे समुद्र में अपने आप को तैरते पाया. वों राजेश से सिस्करियन लेते हुए चीख कर कहने लगी,

‘ऑओह्ह्ह येस्स्स्स फक्क मी हाअन और जोर से और जोर से और तेज़ फक्क मी मेरे फक्कर ऊओह्ह्ह … चोद … जोर से चोद … और जोर से … मान गयी मैं तेरे लन्ड को मेरी चूत… ओह्ह्ह्ह्ह…चोदो मुझे फाड़ डालों मेरी चूत.. जोर से चोदो यह क्या हो रहा है मेरी चूत में कुछ निकल रहा है . ओह्ह्ह्ह मैं . झड़ रही . हून . झड़ी मैं झड़ी ‘ इतना कह कर वह निढाल हो कर सोफे को थाम कर नीचे सो गयी.

राजेश अभी तक झड़ा नहीं था. उसका लन्ड झडने के लिये बेताब था. अपने बदन को ढीला छोड़कर खुद एकता के जिस्म से लिपट कर सो गया.

१-२ मिनट के बाद जब एकता ने अपनी आंख खोली तो मुस्कराते हुए राजेश कि अंखोन में झांका. एकता के चेहरे पर संतुष्टि के भव था. उसको चुदवाने में कभी ऐसा आनंद नहीं मिल था. अपने हथ को बढ़कर राजेश के लन्ड से खेलने लगी. राजेश का लन्ड अभी भी तना हुआ खड़ा था. उसकी प्यास अभी अधूरी थी.

राजेश ने कहा अब एक दौर और हो जाये.

लेकिन एकता बोली जल्दी क्या है. हमारे पास वक्त ही वक्त है. पहले तुम्हारा पानी निकालो. मैं उसे झड़ते हुए देखूंगि और चखूंगि.

राजेश ने एकता को चित लेत दिया और उसके मम्मे पर जा कर बैठ गया. अपने लवडे को उसके दोनों मम्मो के बीच कि खाई में डाल कर अपने लन्ड को हिलाने लगा. टिट-फक्किंग यानी बूब्स-चुदाई करने लगा. दोनों मम्मो के बीच उसका फंस हुआ लन्ड चूत कि तरह उसकी खाई में पेलने लगा.

२५-३० धक्के लगाने के बाद अपने लन्ड को एकता के मुँह में ठेल दिया. एकता उसके लन्ड को मुँह में दाल कर चूसने लगी साथ ही अपने हथ से उसकी गोतिओन को भी छेड़ रही थी. राजेश का लन्ड अब अपना पानी छोड़ने को तैयार हो रहा था.

‘येस्स् मेरी रानी मेरा लन्ड झडने वाला है. इसको बहर निकालो और अपने बूब्स पर रख कर इसे हिलाती रहो अह्ह्ह क्क्क्क्क . ऑह्ह्ह .मेरा पानी निकला..’ कहते हुए उसके लन्ड कि पिचकारी छूटी.

लन्ड लम्बी लम्बी पीक मारता हुआ अपने वीर्य कि पिचकारी उसके मम्मे और चेहरे पर छोड़ने लगा. ६-७ पिचकारी मारने के बाद जब बून्द-बून्द वीर्य बाहर निकालने लगा तो एकता ने लन्ड को वापस मुँह में डाल लिया. उसकी आखिरी बून्दो को अपनी जीभ पर लेकर टेस्ट करने लगी. फिर उसके ढीलें होते लंड को चाट- चाट कर साफ किया और बेद्रूम में जा कर सो गये.

थोड़ी देर बाद ही दोनों के बदन में वापस वासना कि आग जलने लगी. दोनों अंखे खोले बेड़ पर पड़े एक दूसरे के बदन से खेल रहे थे.

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