Friday, April 24, 2009

बिल्कुल कुंवारा

बात उस समय की है जब मैं १८ साल का था और बिल्कुल कुंवारा था। मैं एक क्लीनिक पर काम करता था मेरी वहां रात की ड्यूटी थी। मैं रात को वही सोता था। वहां सुबह-सुबह एक लड़की सफाई करने के लिए आती थी। उसके बारे में क्या बताऊँ मामू ! क्या लड़की थी !

वैसे वो बहुत चालू थी साली ! बहुत लड़कों से चूत मरवा चुकी थी, लेकिन वो बहुत सेक्सी लगती थी। लम्बाई यही कोई ५.३", फिगर सही-सही तो नहीं बता सकता लेकिन मस्त भरा हुआ जिस्म था उसका। चूची भी देखने में अच्छी थी काफी बड़ी-२ ! शक्ल सूरत तो ठीक ठाक ही थी, लेकिन उसकी जो एक चीज दिलकश थी वो थी उसकी बाहर को निकली हुई गांड !

जब वो चलती थी ना तो उसके दोनों कूल्हे आपस में ऐसे रगड़ खाते थे कि अगर उसकी गांड में लंड डाल के उस लड़की को चलाया जाए तो लंड पिस जाए साला ! वो मुझसे हमेशा सेक्सी सी बातें करती थी, मेरे पास से निकलती तो मुझे छूते हुए, लेकिन मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया क्योंकि मैं तब तक लड़कियों के बारे में ज्यादा नहीं जानता था।

उस समय सर्दी के दिन थे, वो सुबह ५ बजे आती थी सफाई करने। मैं वही सोता था, जब वो आती तो मैं अपने दोस्तों के साथ सैर करने के लिए जा चुका होता था तो........

उस दिन मेरे दोस्त मुझे उठाने के लिए नहीं आए थे, लगता था साले रात में ब्लू फ़िल्म देख के मुठ मार के सो गए थे। तो मैं आराम से सो रहा था। वो आई और मुझे हिला कर उठाने लगी। मैंने सोचा- मेरे दोस्त उठाने के लिए आए हैं और मेरा उस दिन जाने का मूड़ नहीं था। मैंने उसका हाथ पकड़ा और एक तरफ़ झटका दिया तो वो सीधी मेरे ऊपर ही आ पड़ी। मुझे अपने ऊपर वजन महसूस हुआ तो मैंने उसे उसकी छाती पर हाथ लगा कर उठाने की कोशिश की तो मुझे लगा कि मेरे हाथ में किसी लड़की के चुचे हैं। मैंने आँख खोल कर देखा तो देखा कि मेरे ऊपर तो वही लड़की है।

मैंने उससे कुछ भी नही पूछा और चुपचाप उसे अपने नीचे डाल लिया और उसके होठो को चूसना शुरु कर दिया। मुझे मजा आने लगा था।

उस समय मेरा दिमाग सुन्न हो गया था, मुझे नहीं पता था कि मैं क्या कर रहा हूँ, क्योंकि मेरी जिन्दगी की पहली लड़की मेरी बाहों में थी और मैं उसे चोदने वाला था। ऐसा लग रहा था जैसे जिन्दगी में इससे ज्यादा मजेदार चीज कोई हो ही नहीं सकती।

मैं उसके मुहं के अन्दर अपनी जीभ घुमाने लगा, वो भी मेरे मुहं में जीभ डाल के चाट रही थी। मैं एक हाथ से उसके चुचे दबाये जा रहा था। कुछ देर के बाद मैं उसके ऊपर से उठा और उसकी सलवार-कमीज उतार के एक तरफ़ फैंक दी। उसके जिस्म पे अब काली ब्रा और पैंटी बाकी थी। ट्यूब लाइट की रोशनी में उसका गोरा जिस्म चमक रहा था।

मैं उसकी गर्दन को अपनी जीभ से चाटने लगा। फ़िर उसके चुचियों के उभारो को चूमना चाटना शुरु कर दिया। वो भी सिसक रही थी मुझे भी मजा आ रहा था। मैंने उसकी ब्रा को उतार फैंका और उसकी चूची चूसने लगा। साली की चूची बड़ी सख्त थी, उसके निप्पल तन के खड़े हो गए थे।

मैं उसके जिस्म के एक एक हिस्से को चूमते हुए नीचे जाने लगा, उसके चिकने पेट को चूमते हुए मैंने उसकी पैंटी भी उतार दी। मैंने सोचा कि उसकी चूत भी चाट लूँ पर उसकी चूत चाटने को दिल नहीं माना।
उसने चूत की शेविंग करके एक दम चिकना बना रखा था। मैंने अपने कपड़े भी उतार दिए और उसे अपना लंड चूसने के लिए कहा। उसने बहुत मना किया लेकिन मैंने उसके बाल पकड़ के खींच दिए। उस वक्त मुझे पता नहीं क्या हो गया था वरना आम तौर पर मैं जानवरों जैसा व्यवहार नहीं करता।

हाँ तो मैंने उसके बाल पकड़ के खींच दिए। जैसे ही उसका मुंह खुला, मैंने अपना लंड उसके मुँह में डाल दिया और पूरा अन्दर ठेल दिया। उसके मुँह से घूं-घूं की आवाज आ रही थी। मुझे पता चल रहा था कि मेरा लंड उसके गले में जाके फंसा हुआ है, फ़िर मुझे उस पे थोड़ी दया आई और मैंने अपना लंड थोड़ा वापस खींच लिया और धीरे-२ अन्दर बाहर करने लगा। मुझे उस वक्त ऐसा मजा आ रहा था कि दिल कर रहा था कि पूरी जिन्दगी ऐसे ही करता रहूँ। काफी देर के बाद मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ तो मैंने उसके मुँह से लंड निकाल लिया।

और उसकी टांग उठा के लंड उसकी चूत के अन्दर डाल दिया। लंड एकदम से अन्दर चला गया। मेरा लंड अच्छा खासा मोटा ताजा है लेकिन उसकी साली की चूत ही कुआँ बन चुकी थी। वो एकदम जोर से चिल्लाई "(हरियाणवी में) आह मेर तो दर्द होव है बाहर काढ ले"

मुझे उस वक्त हँसी भी आई और गुस्सा भी आया कि साली आधे गाँव के लंड खा चुकी है और ऐसे चिल्ला रही है जैसे साली सील मुझसे ही पड़वा रही है।

मैंने उसकी बात सुने बगैर चुपचाप उसे पेलना जारी रखा। वो मुझसे जोर से चिपकी हुई थी उसके निप्पल कड़े होकर मेरी छाती में गडे हुए थे और नीचे से गांड उठा-२ के धक्के लगा रही थी। धक्के क्या लगा रही थी साली एक कुंवारे लंड की इज्जत लूट रही थी। बेशक मेरा लंड उसकी चूत में था और मैं उसके ऊपर था लेकिन मैं उसे नहीं, वो मुझे चोद रही थी क्योंकि वो इस चुदाई की माहिर थी मैं तो सिखधर ही था अभी।

थोड़ी देर के बाद उसने मुझे जोर से भींच लिया और मेरे कंधे पे दांत गाड़ने लगी। मैं हिल नहीं पा रहा था, ना ही अपना लंड आगे पीछे कर पा रहा था। उसने अपनी चूत को एक बार सिकोड़ना और एक बार ढीला करना शरु कर दिया। शायद वो टपक रही थी फ़िर उसने मुझे ढीला छोड़ दिया और मैंने जैसे ही धक्के लगाने शुरु किए, मुझसे कहने लगी "(हरियाणवी में) हाय बाहर काढ ले मेर तो दर्द होण लाग्या इब "

मैंने कहा- साली मेरा स्वाद क्या तेरी माँ निकलावाएगी ! और मैंने उसे जोर से पकड़ के धक्के लगाने शुरु कर दिये तो वो बार-२ निकालने के लिए कहने लगी।

मैंने कहा- गांड में डलवाएगी तो छोड़ दूंगा।

तो वो मान गई। मैंने उसकी चूत से लंड निकाल लिया, वो उसकी चूत के पानी में भीगा हुआ था और टपक रहा था। मैंने उसको मरीजों को लेटाने वाली मेज के पास खड़ा किया और उसकी छाती को मेज पे टिकवा दिया। अब उसके पैर जमीन पे थे और वो मेज पे छाती टिका के झुकी हुई थी। मैंने उसके दोनों हाथों को उसकी पीठ पे एक हाथ से पकड़ा और दूसरे हाथ से अपना लंड पकड़ के उसकी गांड पे टिका के एक जोर का धक्का लगाया। मेरा करीब आधा लंड उसकी गांड में चला गया, वो जोर से चिल्लाने लगी और अपने हाथो को छुड़ाने की कोशिश करने लगी।

मैंने एक हाथ उसके मुँह पर रख के जोर से दबा लिया और दूसरे हाथ से उसके दोनों हाथों को जोर से पकड़ लिया। वो छटपटा रही थी और उसकी आंखों से आंसू निकल के मेरे हाथों पे बह रहे थे। शायद उसने अपनी गांड अब तक कुंवारी रखी हुई थी जो आज मैंने फाड़ डाली। यह सोच के मैं बहुत खुश हुआ और मैंने एक जोर का धक्का और लगा के अपना पूरा लंड उसकी गांड में उतार दिया और जोर-२ से ध्क्के लगाने लगा।

उसके नीचे की मेज भी मेरे धक्कों के साथ-२ आगे पीछे हिलते हुए चरमरा रही थी। करीब १० मिनट बाद में मेरे वीर्य की पिचकारी उसके अन्दर अन्दर छुटने लगी। मैंने उसके हाथों और मुँह पर से हाथ हटा के दोनों हाथों से उसकी चुचियों को पकड़ लिया और उन्हें जोर-२ से भींचते खींचते हुए उसके अन्दर झड़ने लगा, पूरी टंकी खाली करने के बाद मैं उसके ऊपर ही ढेर हो गया।

करीब १० मिनट के बाद हम लोग उठे मैंने देखा की मेरा लंड कई जगह से छिला हुआ है। मैंने बाथरूम में जाके अपना लंड साफ किया, उसने अपनी गांड और चूत साफ की और क्लिनिक की सफाई करने लगी। मैं भी थक चुका था।

लड़के ने आज बहुत मेहनत की थी भाई, अपनी जिन्दगी की पहली गांड मारी थी और पहली चुदाई हर आदमी के लिए खास होती है।

मैं उसी चुदाई के बारे में सोचते हुए घर चला गया...........
मेरे एक रियल दोस्त का अनुभव ...

मेल करना न भूले और

जोर से बोलो laand

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