Wednesday, April 29, 2009

धक्के की ताकत

मेरे पड़ोस मैं पप्पी रहती थी। वो ११ मैं पढ़ रही थी। उसकी उमर १८ साल थी, पप्पी बहूत सेक्सी थी। उसके बूब्स मुझे बहूत अच्छे लगते थे।। वो एकदम हरी-भरी थी। मेरी उसके घरवालो के साथ ओर उसके साथ अच्छी रेगुलर बातें होती रहती थी, क्योंकि उसकी और हमारी छत (टेरस) एक ही थी, बीच मैं सिर्फ़ ३’ की एक दीवार थी। वो स्टडी मे कमजोर थी, उसके एग्जाम आने वाले थे, उसकी मुम्मी ने मुझसे कहा कि परेश, पप्पी के एग्जाम शुरू होने वाले हैं, वो स्टडी में कमजोर हैं, उसे थोड़ा टाइम निकाल कर पढ़ा दिया करो। मैंने हां कर दी, मैं रोज रात को ८ बजे उसके घर उसे पढ़ाने जाता। मेरा रूम फ़र्स्ट फ़्लोर पर था, उसका भी एक रूम फ़र्स्ट फ़्लोर पर था, वो बन्द रहता था क्योंकि उसके मम्मी, पापा और उसका छोटा भाई जो १२ साल का था सब ग्राउंड फ़्लोर पर ही रहते थे। दो दिन के बाद मैंने उसकी मम्मी से कहा, "भाभी नीचे हम डिस्टर्ब होते हैं, क्या हम आपके ऊपर वाले रूम मैं पढ़ाई कर सकते हैं?"
उन्होने तुरन्त हां कर दी। मैं रोज़ रात को ८ बजे जाता और रात के ११-१२ बजे तक वहाँ पर रुकता था। वो पढ़ाई मे बहूत कमजोर थी। उसे अच्छे से कुछ भी याद नहीं होता था, मैंने उसकी मम्मी से कहा तो उन्होने बोला कि अगर नहीं पढ़ती है तो पिटाई कर दिया करो, तो मैंने एक दिन उसे उसकी मम्मी के सामने ही हलका सा एक थप्पड़ मारा, उस दिन मैंने उसे पहली बार टच किया था, उसका गाल एकदम गरम था, थप्पड़ खा कर वो मुस्कराने लगी। अगले दिन उसने जींस और शर्ट जिसके बटन सामने खुलते थे पहने हुए थी, मैं उसके सामने बैठा कर उसे मैथ्स समझा रहा था, उसके शर्ट का एक बटन टूटा हुआ था, उसका ध्यान पढ़ाई मे था और मेरा ध्यान उसके टूटे हुए बटन मे उसके बूब्स पर था, उसकी काली ब्रा और व्हाइट बूब्स मेरे सामने दिख रहे थे। अचानक उसका ध्यान अपने टूटे हुए बटन पर गया तो वो शर्माइ और नीचे जा कर शर्ट चेन्ज कर के आई। मैंने पूछा क्या हुआ तो उसने बोला आप मुझे अच्छे से पढ़ा नहीं पा रहे थे।
अगले दिन उसने टाइट टी शर्ट पहनी हुई थी जिसमे उसके बूब्स का उभार गजब ढा रहा था, मेरा ध्यान वहीं पर था, उसने पूछा, "परेश, क्या हुआ तुम्हारा ध्यान कहाँ हैं?" मैंने कहा, "मेरा ध्यान तुझमे हैं"। वो शरमाई और बोली धत, मेरी हिम्मत बढ़ गयी। मैंने हलके से उसके गाल पर चपत लगाया और प्यार से मुस्कराया। जवाब मे वो भी मुस्कराई। मेरी हिम्मत और बढ़ी मैंने उसके दोनो गालो को पकड़ कर उसके होठों को चूम लिया, उसने दूर हटाते हुए कहा मम्मी आ जायेगी और हम वापस पढ़ाई मे लग गये।
अगले दिन उसके मम्मी, पापा और उसका भाई किसी काम से बाहर गये थे, जाते समय उसकी मम्मी ने मुझसे कहा कि पप्पी घर पर अकेली है तुम रात को हमारे घर पर ही सो जाना, मुझे तो जैसे मन मांगी मुराद मिल गयी। रात को ८ बजे मैं उसके घर गया। वो ग्राउन्ड फ़्लोर पर थी आज उसने सुन्दर सी ब्लैक कलर की नाइटी पहन रखी थी, हम दो घण्टे तक पढ़ते रहे। बाद मे वो अपने रूम मे जाकर सो गयी मैं बाहर हाल मैं सो गया, अचानक वहाँ लाइट चली गयी। वो रूम से बाहर आई और मेरे पास हाल मे बेड पर बैठ गयी और हम बातें करने लगे, उसने मुझसे कहा "परेश, आइ लव यू"। मैंने कुछ नहीं बोला और उसे अपनी बाहों मे ले लिया वो चुप रही उसने कुछ भी नहीं बोला, मैंने उसे चूमना शुरू कर दिया, वो हलका सा विरोध करती रही इतने मे लाइट आ गयी तो मैंने देख उसका चेहर एकदम लाल हो रहा है और आँखे अपने आप बन्द हो रही हैं, मैंने धीरे से उसके बूब्स पर हाथ फिराया तो वो एक दम से मुझसे चिपक गयी।, मैं उसके रसीले होठों को चूमता रहा और हाथो से धीरे धीरे उसके बूब्स को दबाता रहा, वो मदहोश हो गयी।
मैं थोड़ा आगे बढ़ा और मैंने उसकी नाइटी धीरे से उतार दी। अब वो मेरे सामने पिन्क ब्रा और पैन्टी मे थी, उसकी फ़िगर देख कर मैं अपने होश खो गया। मैंने उसके पूरे बदन को चूमना शुरू कर दिया। वो भी मुझे चूमने लगी और मेरे कपड़े उतारने लगी। अब मैं भी सिर्फ़ अन्डरविअर मे था, मैं उसे चूमता रहा और उसके पूरे शरीर पर हाथ घूमाता रहा, वो उसके निप्पल क्या पत्थर की तरह कड़क थे, मैंने अपने हाथ उसके पीछे ले जाकर उसकी ब्रा का हुक खोल दिया, एक झटके से ब्रा उसके हाथ मे आ गयी, और उसके बूब्स आज़ाद हो गये, इस समय के पहले भी मैंने ३-४ बार सेक्स किया था लेकिन उसका हुस्न देख कर मैं अपने होश खो गया, और धीरे से मैंने उसकी चड्डी भी उतार दी। बदले मे उसने भी मेरी चड्डी उतार दी।
अब हम दोनो नन्गे थे। हम दोनो एक दूसरे को चाटते रहे। मैंने अपना मुँह उसके निप्पल पर लगाया और उसको चूसने लगा उसने मेरे लण्ड को हाथ मे ले लिया और उसको सहलाने लगी। मेरा लण्ड लोहे की तरह एक दम कड़क हो गया, मैंने धीरे से अपने लण्ड को उसके मुँह के पास किया तो वो उसे चूमने लगी। मैंने उसे मुँह मैं लेने को कहा तो वो उसे मुँह मैं लेकर चूसने लगी। मेरा बड़ा बुरा हाल हो रहा था, मैंने अपनी उँगली धीरे से उसकी चूत मे डाल दी, उसकी चूत गरम तवे की तरह तप रही थी। मेरी उँगलियां उसकी चूत की गरमी महसूस कर रही थी।
वो मेरे लण्ड को चूसती रही और मेरी उँगलियां उसकी चूत के साथ खेलती रही। अब वो चुदवाने के लिये एक दम तैयार थी, उसकी चूत मेरी उँगलियों की हरकत से पानी से भर गयी और गीली हो गयी, मैं अपना मुँह उसकी चूत पर ले गया और उसकी जाँघों और उसकी चूत को चूमने लगा। वो जोर जोर से पाँव हिलाने लगी। मैंने अपनी जीभ उसकी चूत मैं डाल दी और उसके पानी को पीने लगा। वो एक दम मदहोश हो गयी और मेरे लण्ड को दाँत चुभाते हुये और जोर से चूसने लगी। थोड़ी देर मे उसकी चूत ने और पानी छोड़ दिया। मैं उसे पीता रहा। कुँवारी चूत का पानी पीने का मेरा यह पहला मौका था, और उसके मुँह मे मेरे लण्ड ने भी ढेर सारा पानी छोड़ दिया जो सीधे उसके गले मे गया, उसने बड़े प्यार से मेरा पूरा पानी पी लिया और एक भी बून्द बाहर नहीं गिरने दी, और मेरे लण्ड को चुसना जारी रखा ३-४ मिनट मे मेरा लण्ड वापस तन गया। उसकी हरकतो से मुझे लगने लगा कि वो चूदाइ के लिये बहूत आतुर है।
मैंने उसे बेड पर सीधा लिटाया और उसकी गाँड के नीचे एक तकिया लगाया जिससे उसकी चूत ऊपर आ गयी, मैंने अपने लण्ड को उसकी चूत पर फिराने लगा। उसकी चूत तन्दूर की तरह गरम थी, उसने कहा कि उसने कभी चुदवाया नहीं है। मेरा इतना मोटा लण्ड उसकी चूत मैं कैसे जायेगा, मैंने कहा थोड़ा सा दर्द होगा लेकिन बाद मे मज़ा आयेगा। मैंने अपने लण्ड और उसकी चूत पर क्रीम लगायी और अपना लण्ड धीरे से उसकी चूत मे घुसाने लगा। उसकी चूत बहूत टाइट थी। मेरे लण्ड का सुपाड़ा उसके अन्दर जाते ही वो जोर से बोली, "बहूत दर्द हो रहा है"। मैं वहीं पर रूक गया और उसकी चूचीयों को सहलाने लगा और उसके होठों को चूमने लगा। थोड़ी देर मे पप्पी जोश मे आ गयी और अपने चूतड़ उठाने लगी। मैंने ऊपर से थोड़ा जोर लगाया, मेरा लण्ड उसकी चूत मैं ३ इन्च घुस गया वो जोर से चिल्लाने लगी और पसीने मे नहा गयी। मुझसे कहने लगी, "प्लीज! बाहर निकालो"।
मैंने उससे बोला कि पहली बार मे थोड़ा दर्द होता है और उसे चूमने लगा। कुछ देर बाद वो शान्त हो गयी। मैंने उससे बोला कि अपना मुँह बन्द रखना। मैं अभी अपना पूरा लण्ड तेरी चूत मे डालुंगा। उसने जोश मे आकर कहा अगर मैं चीँखू भी तो भी तुम नहीं रुकना। मैं धीरे धीरे अपने लण्ड को उसकी चूत मैं ३ इन्च मे अन्दर बाहर करने लगा। उसे भी मज़ा आने लगा, और वो मुझसे ज्यादा चिपकने लगी। अचानक मैंने एक जोर का झटका दिया और अपना पूरा 7 इन्च का लण्ड उसकी चूत मे घूसेड़ दिया। वो बहूत जोर से चींखी और जोर से तड़पने लगी। मैं वहीं पर रूक गया। उसकी चूत मैं से खून निकलने लगा था। वो जोर जोर से रोने लगी, मैंने उसे प्यार से समझाया कि मेरा पूरा लण्ड उसकी चूत मैं चल गया है। अभी थोड़ा सा दर्द होगा लेकिन बाद मे जो मज़ा आयेगा वो पूरा दर्द भुला देगा। मैंने उसके लाख कहने पर भी अपना लण्ड उसकी चूत से नहीं निकाला।
पाँच मिनट तक मैं सिर्फ़ उसके बूब्स को चूसता रहा और उसके पूरे शरीर पर हाथ फ़िराते रहा। धीरे धीरे उसका दर्द कम हुआ और उसे जोश आने लगा। वो मुझसे चिपक गयी और अपने चूतड़ उठाने लगी। उसकी चूत मेरे लण्ड को कभी जकड़ती और कभी ढीला छोड़ती। मैं इशारा समझ गया और मैंने धीरे धीरे अपने लण्ड को उसकी चूत मैं अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया। थोड़ी देर मैं उसे भी मज़ा आने लगा और वो भी हिल हिल कर चुदाइ का मज़ा लेने लगी। १० मिनट तक मैं उसे चोदता रहा। इतनी देर मे उसकी चूत गीली हो गयी और उसका दर्द कम हो गया, और वो बहूत मज़े लेकर चुदवाने लगी। करीब १५ मिनट के बाद मैंने उसे कहा कि मैं झड़ने वाला हूँ। मैंने उसे टाइट पकड़ा, जिससे उसके मुंह से आवाज न निकले उसके होठ अपने होठो में मजबूती से दबा लिये और सरपट घोड़ा दौड़ा दिया। मैं पूरे जोश मे आ चुका था और मैं अपना लण्ड पूरा बाहर निकाल कर एक धक्के से पूरा घूसा देता, पूरी फूर्ती से। अब वो बुरी तरह छूटने के लिये दम लगा रही थी और मैं उसे उतना ही मजबूती से पकड़ रहा था। झटके पर झटके। धक्के पर धक्के। एक दो मिनट में उसकी चूत बुरी तरह से मेरे लण्ड को रोकने की कोशिश कर रही थी। और मुझे साफ़ पता चला जैसे कि उसकी चूत ने एक जोर से पिच्कारी मेरे लण्ड पर छोड़ दी। अब मैंने रफ़्तार और धक्के की ताकत बढ़ा दी और बड़े दम लगाने पर मैं भी चरम आनन्द पर पहूँच गया। ऐसा लगा जैसे मेरे लण्ड से कोई टँकी खुल गयी हो और मैंने बहुत सारा पानी उसकी चूत मैं भर दिया। करीब १० मिनट तक उसके ऊपर लेटा रहा। हम दोनो की सांस की आवाज से पूरा कमरा गूँज रहा था।
उसके बद हम दोनो उथे और बाथरूम मे जाकर उसकी चूत और मेरे लण्ड को धो कर साफ़ किया और वापस आकर बेड पर बैठ गये, मेरा लण्ड इतनी देर मे वापस तन कर खड़ा हो गया। उसे तना देखकर वो बोली अब नहीं परेश, अभी दो घण्टे सो लेते हैं। उसके बाद करेंगे। मैंने कहा ठीक है। हमने अपने कपड़े पहन लिये और अपना सोने लगे। लेकिन आंखो में नींद कहां। करीब एक घण्टे बाद मैने उसके और अपने कपड़े फिर उतार दिये। उसने कहा कि प्यार से करना क्योंकि अभी थोड़ा थोड़ा दर्द हो रहा है। मैंने उसके बदन को दबाना शुरू कर दिया, बच्चो कि तरह उसका दूध पीने लगा तो वह कसमसा उठी। और उसने भी मुझे चूमना शूरू कर दिया और खुद-ब-खुद 6-9 की पोजीशन में आ गये। वो मेरे लण्ड को चूस रही थी और मैं उसकी चूत को। फिर मैं काम शास्त्र में बताये एक एक आसन से उसे चोदने लगा और एक ही रात में कली को खिला कर फ़ूल बना दिया।
फिर तो हम दोनो को जब भी मौका मिलता वो मुझसे चुदवाती थी, करीब एक साल तक मैं उसे चोदता रहा, उसके बाद उसके पापा की बदली हो गयी। उसके बाद से आज तक उससे मेरी मुलाकात नहीं हुई है। वो मेरे जीवन सबसे हसीन कली थी जिसे फूल बनाने का जिम्मा खुदा ने मुझे इनाम मे दिया था।

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