Tuesday, May 5, 2009

स्वीटी की गांड

स्वीटी के घर से जाने के बाद भी मेरी ख्वाहिशें और इच्छायें कम नहीं हो रही थी। उस रात मैं ठीक से नहीं सो पाया, जबकि होना यह चाहिए था कि इतनी चुदाई और मेहनत के बाद मुझे तबीयत की नींद आनी चाहिये थी, मगर नहीं आ रही थी, मुझे रह रहकर स्वीटी की चुद या गांड दिख रही थी, अंत में मुझे, कसम से, जिंदगी में पहली बार, मुठ मार कर सोना पड़ा। ऐसे ही दो चार दिन निकल गये। इस बार मैंने सोच रखा था कि अब मैं स्वीटी की अनछुई कुंवारी गांड पर हाथ साफ करूंगा, यानि कि गांड मारूंगा।

ईश्वर सच में बडा ही दयालु हैं, उसने मेरी सुन ली। मुझे स्वीटी का करीब एक सप्ताह बाद बुलावा आया। मैं खुश था कि इस बार उसने मुझे रात में बुलाया है, जिससे मुझे स्वीटी को चोदने के लिये पूरी रात मिलेगी।

मैं शाम को करीब ८ बजे ही स्वीटी के घर पहुंच गया। वहां स्वीटी ने बताया कि उसके पति फेक्ट्री के काम से बाहर गये हैं, जो एक दो दिन में आयेंगे। बस फिर क्या था, मैं आजाद था, मैं बेडरूम में गया, तब तक स्वीटी फ्रीज से बीयर की बोतल निकाल लाई और मैंने आज उसे गिलास में न डलवा कर उसे वैसे ही बोतल में रहने दी क्योंकि मुझे आज कुछ अलग तरह से प्यार करना था। मैं स्वीटी को बेडरूम की दीवार के सहारे चिपकाकर पहले एक लम्बी होंठ किस करते हुए उसके गाऊन के ऊपर से ही अपने एक हाथ को उसके प्यारे बॉब्स पर रखकर सहलाने लगा और दूसरे हाथ को उसकी चूत पर रखकर सहलाने लगा और १५-२० मिनट बाद धीरे धीरे स्वीटी के गाऊन को उतारा और अब स्वीटी कुल मिलाकर ब्रा पेंटी में थी।

मैंने ब्रा के ऊपर से ही उसके स्तनों को अपने दोनो हाथों से सहलाया और चूमा फिर स्वीटी को बेड पर लेटा कर पेंटी और ब्रा को भी आजाद कर दिया फिर स्वीटी ने भी मेरे सारे कपड़े खोल दिये। आज मुझे स्वीटी को अंगुरी बनाना था और जैसा सोच कर आया था वैसा ही करने का मूंड था। मैं बेड पर लेटी स्वीटी के बुब्स को आराम सहलाते हुये चूसने लगा और फिर धीरे धीरे नीचे की ओर बढ़ने लगा और चूत चटाई शुरू कर दी, मगर कोरी चूत चटाई नहीं की, दोस्तो ! मै बीयर की बोतल खोलकर उसकी धार पहले स्वीटी के बोबों पर डालता हुआ चाटने लगा। इस वक्त अगर कोई देख लेता तो सच में मुझे कुत्ता ही समझ लेता।

इधर स्वीटी की गर्मी बढ़ती जा रही थी। वह मुंह से- संजू ये क्या कर रहे हो? ऐसे तो मुझे गुदगुदी हो रही हैं ! मुझसे रहा नहीं जा रहा है और आ.आ.आ………हहहहह की आवाजें करने लगी। मगर अभी तो मेरी बस आज की शुरूआत थी। बोब्स से उतर कर नीचे की ओर बह रही बीयर की धार जो बाद में नाभि के खास छिद्र पर जा रही थी। वहां जैसे ही मैनें जीभ लगायी, कसम से स्वीटी एकदम से चिल्ला पड़ी कि ये क्या कर रहे हो संजू, ऐसे तो मैं बिना चुदे ही झड़ जाऊंगी।

मैनें कहा- स्वीटी डांर्लिग चिंता ना करो, पूरी रात बाकी हैं। शेष आधी बोतल मैं उसकी चूत पर धार बनाकर डालने लगा और चाटने लगा। कसम से अब मुझे बीयर के साथ-साथ मुझे स्वीटी की चूत से निकल रहा पानी, शायद स्वीटी इस दौरान एकाध बार झड़ चुकी थी, भी सोमरस से कम नशा नहीं दे रहा था। मैनें चूत चाटने में आधा घंटा लगाया जिसमें चू्त के हर कोने को अपनी जीभ से नाप लिया था।

स्वीटी मुझसे कम नहीं थी, वो भी मेरी ओर देख मुझे चिड़ाते हुवे दूसरी बीयर की बोतल खोल कर मुझे बेड के सिरहाने लेटा खुद मेरे लंड को अपने मुंह में लेने लगी और मेरी नाभि पर व मेरे लंड के ऊपर व नीचे बीयर डालकर चाटने लगी, चूसने लगी। आज स्वीटी की चुसाई में एक अलग ही आनन्द था मेरे मुंह से आह…….ऊ……. आह……. तक निकाल दी, मैं थोड़ी देर में झड़ गया, मगर स्वीटी ने मुझे छोड़ा नहीं उसने मेरा सारा जूस निकाल लिया और बिल्ली दूध पीकर कटोरे को जीभ से चाटती हैं, वैसे ही उसने मेरे लंड के पानी को गटक लिया और अंत तक चाटती रही और अपने हाथ और मुंह से मेरे लंड को फ़िर खड़ा करने लगी।

थोडी देर में हम दोनो तैयार हो गये, मैंने आज लेटे लेटे ही स्वीटी को अपने ऊपर चढ़ाया और उससे उठक-बैठक करने को कहा। स्वीटी तुरंत मेरे लंड पर आकर बैठ गई और मेरे लंड के सुपाड़े को अपनी चूत का रास्ता बताने लगी, शायद उसने इसे सामान्य चुदाई समझ लिया था, वह बेफिक्र थी, मगर जैसे ही उसने मेरे लंड के सुपाड़े को अपनी चूत का रास्ता बताया मैंने एक ही शॉट नीचे से अपने लंड का दिया तो लंड को सीधे उसकी बच्चेदानी तक पहुंचा दिया।

दोस्तो, वह इसके लिये तैयार नहीं थी। उसकी आंखों से आंसू आ गये और नीचे उतरने की जिद करने लगी, पर मैं फिर उसे प्यार से समझाकर धीरे धीरे शाट लगाने लगा और अपने दोनो हाथों से उसके बुब्स मसलने लगा। कभी कभी उसकी चूंचियों को जोर से दबा देता जिससे वह फिर उत्तेजित होने लगी। अब मैंने शॉट मारना बंद कर दिया अब वह खुद ही ऊपर नीचे होने लगी और हाय संजू मजा आ गया आ……….ह………अ.अ….अ..ा…….. करने लगी।

शायद अब उसे मस्ती चढ़ने लगी, मैं भी कभी नीचे से शॉट लगाता तो लंड फिर बच्चेदानी तक चल जाता, मगर अब उसे इस दर्द में भी मजे की अनुभूति हो रही थी। स्वीटी की स्पीड धीरे-धीरे तेज होने लगी और कहने लगी आाााााहााााााा सं……जू….. मेरा निकल रहााााा है और वह झड़ गयी। कुछ देर बाद मैं भी झड़ गया। वह मेरे ऊपर ही लेट गयी।

थोडी देर बाद मेरा हाथ उसकी गांड की तरफ बढ़ा तो वह चौंक गयी और बोली संजू ये क्या कर रहे हो? तुम्हारे इरादे तो नेक हैं?

मैंने कहा- स्वीटी डार्लिंग ! आज मेरे इरादे क्या मेरा सब कुछ नेक है और मुझे आज तुम्हारी गांड मारनी हैं।

नहीं संजू मुझे दर्द होगा मैनें आज तक गांड नहीं मराई !

मैंने उसे समझाया कि जैसे पहली बार चुदवाने में दर्द होता हैं, वैसा ही थोड़ा सा पहले पहले दर्द होगा फिर मजा चुदवाने से ज्यादा गांड मराने में आयेगा। वह मेरी बात मान गई और तब तक मेरा लंड अपने झटके दिखाने को तैयार हो चुका था। मैंने स्वीटी को घोड़ी बनाया और अपने लंड पर ढेर सारा तेल लगाया और दो उंगलियों पर तेल लेकर उसकी गांड में धीरे धीरे डालने लगा, जिससे कि उसकी गांड मेरा लंड लेने को तैयार हो जाए, मेरी उंगली जाते ही कहने लगी- संजू डार्लिंग मुझे दर्द हो रहा है !

तो मैंने कहा- जान, कुछ देर की बात हैं व फिर मैं एक हाथ उसके स्तनों की ओर ले गया और चूंचियों मसलने और सहलाने लगा और उसके गरदन, कान व गाल आदि को चूमने लगा, जिससे वह उत्तेजित होकर मेरा हाथ चूंचियों से हटा कर अपनी चूत के विराने की ओर ले गयी और मुझे उंगली करने का इशारा करने लगी। मैं उसकी चूत में उंगली डाल कर उसे धीरे धीरे उंगली से चोदने लगा।

और इधर अब मेरे लंड ने भी कसरत चालू कर दी और झटके मारने लगा। मुझसे भी रहा नहीं जा रहा था, मैंने धीरे से अपना सुपाड़ा उसकी गांड के छेद पर रखा और धीरे धीरे डालने लगा मगर स्वीटी की गांड अनछुई होने के कारण बार बार लण्ड फ़िसल जाता और मेरा लंड महाराज दरवाजे पर ही अटक जाता। खैर मुझे आज स्वीटी की गांड मारनी थी, सो एक हाथ जो चूत की तरफ था उससे चूत को अंदर से पकड़ कर अपने लंड को स्वीटी की गांड के छेद पर लगाकर एक जोरदार झटका दिया, जिससे स्वीटी आगे को जाने लगी मगर मेरे एक हाथ से चूत पकड़ी होने के कारण वह आगे तो नहीं जा सकी अपितु चिल्ला जोर से गई आहहहहहहहहहहह संजू क्या मार डालोगे, अपने इस लंड को बाहर निकालो नहीं तो मैं मर जाऊंगी।

मैंने उसे पकड़े रखा और स्वीटी छुटने के लिये तड़पने लगी, मगर कुछ देर बाद मेरे एक हाथ से चुंचियों को सहलाने व मसलने और उसके कान, गले और मुंह चुम्माचाटी करने पर वह फिर हिलने लगी। अब मुझे गांड मारने का समय सही लगा और धीरे धीरे स्वीटी की गांड में अपना लंड पेलने लगा। स्वीटी भी मस्ती में आकर चिल्लाने लगी, संजू फाड़ डाल मेरी गांड को आह….अ….ा…ह…..ऊ………अ…..ा….ह करने लगी।

१५-२० मिनट बाद मुझे लगा कि मैं झडने वाला हूँ, तो मैंने स्वीटी को कहा डार्लिंग मेरा निकलने वाला है, तो उसने सीधे मुंह में झड़ने को कहा और मैं अपने लंड को स्वीटी की गांड में से निकाल कर उसके मुंह में डालकर मुखचोदन करने लगा और ८-१० झटको के बाद मैं झड़ गया और इसी तरह स्वीटी को पूरी रात कभी एक टांग कंधे पर रख कर चोदा तो कभी कुत्तिया बनाकर चोदा।

सुबह ६ बजे तक चोदन कार्यक्रम चलता रहा, फिर नौकरानी के आने का समय बताकर मुझे जाने को कहा और मुझे फिर से रूपए देने लगी तो मैंने उसे मना किया, मगर वह नहीं मानी।

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